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शिशॠकी मालिश के लिठसबसे अचà¥à¤›à¥‡ तेल
अधिकांश माà¤à¤à¤‚ हर रोज शिशॠको नहलाने से पहले या फिर इसके बाद तेल से उसकी मालिश करती हैं। यह à¤à¤• पारंपरिक पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¨ है, जिसे जारी रखना अचà¥à¤›à¤¾ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इस बात के पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ à¤à¥€ हैं कि मालिश से आप और आपके शिशॠदोनों को फायदा होता है। और तेल से मालिश करना आपके लिठआसान होगा और शिशॠको à¤à¥€ इससे अधिक आराम मिलेगा।
शिशॠकी मालिश के लिठकौन सा तेल सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
आप शिशॠकी मालिश के लिठवनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेल या मिनरल बेबी आॅयल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर सकती हैं। यदि आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर चकतà¥à¤¤à¥‡ हैं या फिर उसकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ शà¥à¤·à¥à¤• या संवेदनशील है, तो आपको तेल के विकलà¥à¤ªà¥‹à¤‚ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ देना होगा। वैसे इस बात के कोई ठोस पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ नहीं है कि कोई à¤à¤• तेल दूसरे से बेहतर है। कà¥à¤› तेल तà¥à¤µà¤šà¤¾ में आसानी से अवशोषित हो जाते हैं, मगर शोध दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हैं कि उनमें अनà¥à¤¯à¥‹à¤‚ की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ अंतर नहीं हैं।
कà¥à¤› विशेषजà¥à¤ž वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ या पौधों पर आधारित तेल लगाने की सलाह देते हैं, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे आसानी से अवशोषित हो जाते हैं। यदि शिशॠतेल से चिकनी अपनी उंगलियों को चूस à¤à¥€ ले, तो à¤à¥€ परेशानी की बात नहीं होती, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह तेल आसानी से पचने वाला होता है। यदि आप वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर रही हैं तो शà¥à¤¦à¥à¤§, परिषà¥à¤•ृत तेल (रिफाइंड आॅयल) शिशॠकी नाजà¥à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठबेहतर होते हैं। रिफाइंड आॅयल में हलà¥à¤•ी खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ और पतला टेकà¥à¤¸à¤šà¤° होता है, साथ ही यह काफी लंबे समय तक खराब à¤à¥€ नहीं होता। इनमें यीसà¥à¤Ÿ, फफूंद या कवक के बीजाणà¥à¤“ं जैसी अशà¥à¤¦à¥à¤§à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ होने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ कम होती है। मिनरल बेबी आॅयल à¤à¥€ à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª हैं। ये पेटà¥à¤°à¥‹à¤²à¤¿à¤¯à¤® से बनाठजाते हैं और लंबे समय से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ ढंग से इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किठजा रहे हैं। यदि शिशॠअपनी उंगलियों को मà¥à¤‚ह में चूस à¤à¥€ ले, तो à¤à¥€ ये नà¥à¤•सानदेह नहीं है। गरà¥à¤®, आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम में इनके खराब होने या सड़ने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤à¥€ बहà¥à¤¤ कम होती है।
शिशॠकी रà¥à¤–ी या संवेदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾ की मालिश के कौन से तेल इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने चाहिà¤?
शà¥à¤·à¥à¤• व संवेदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठनिमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित तेल अचà¥à¤›à¥‡ विकलà¥à¤ª माने जाते हैं:
वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेल जिनमें पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में हो
इन तेलों में लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ नामक ततà¥à¤µ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ à¤à¤• फैटà¥à¤Ÿà¥€ à¤à¤¸à¤¿à¤¡ होता है जो सà¥à¤•िन बैरियर को बचाने में मदद कर सकता है। यह शिशॠकी संवेदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठकाफी सौमà¥à¤¯ माना जाता है।
जिन वेजिटेबल आॅयल में लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है, उनमें शामिल हैं:
सूरजमà¥à¤–ी के बीज (सनफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° सीड) का शà¥à¤¦à¥à¤§ रिफाइंड तेल
अंगूर के बीज से बना तेल (गà¥à¤°à¥‡à¤ªà¤¸à¥€à¤¡ आॅयल)
कà¥à¤¸à¥à¤® के बीज से बना तेल (सैफà¥à¤²à¤¾à¤µà¤° सीड आॅयल)
सà¤à¥€ वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों में लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ नहीं होती। कà¥à¤› में ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ अधिक होता है, जो कि à¤à¤• मोनोसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤Ÿ वसा है। लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों और बेबी मिनरल आॅयल की तà¥à¤²à¤¨à¤¾ में ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ वाले वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठकठोर रहते हैं। बहरहाल, वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों के लेबल पर सामानà¥à¤¯à¤¤: ओलिà¤à¤• या लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ के बारे में नहीं लिखा होता। हालांकि, वे पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ या मोनोअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा के अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤à¥‹à¤‚ के बारे में जरà¥à¤° बताते हैं। सामानà¥à¤¯ नियम के तौर पर:
जिन वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों में लिनोलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है, उनमें पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¡ वसा à¤à¥€ उचà¥à¤š होती है।
जिन वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों में ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ अधिक होता है, उनमें मोनोअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा à¤à¥€ उचà¥à¤š होती है।
यदि आप तेल के चà¥à¤¨à¤¾à¤µ को लेकर चिंतित हों, तो उस तेल का इसतेमाल करें जिसमें पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¤¡ वसा उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में हो। बहरहाल, कà¥à¤› वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों में पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ और मोनो अनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा, दोनों होती हैं, इसलिठहमेशा यह चà¥à¤¨à¤¾à¤µ आसान नहीं होता।
असà¥à¤—ंधित मिनरल आॅयल (बेबी आॅयल) असà¥à¤—ंधित (परफà¥à¤¯à¥‚म रहित) बेबी मिनरल आॅयल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² रà¥à¤–ी या संवेदनशील तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठकरना अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है। अगर आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पहले से ही खराब या शà¥à¤·à¥à¤• है, तो बेहतर है कि गंध वाले उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ का इसà¥à¤¤à¥‡à¤¾à¤² न किया जाà¤à¥¤ नारियल तेल
नारियल तेल à¤à¤• और à¤à¤¸à¤¾ तेल है जो à¤à¤¾à¤°à¤¤ में वà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¤• तौर पर उपलबà¥à¤§ है और इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जाता है। कà¥à¤› शोध दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¥‡ हैं कि यह रà¥à¤–ी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की नमी और रूप-रंग को बेहतर बना सकता है।
शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठकौन से तेल सही नहीं हैं?
यदि आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ रà¥à¤–ी, संवेदनशील है या फिर उसे à¤à¤•à¥à¤œà¤¿à¤®à¤¾ है या तà¥à¤µà¤šà¤¾ कट-फट रही है, तो बेहतर है कि मालिश के लिठसरसों के तेल, घी या जैतून के तेल (आॅलिव आॅयल) का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न किया जाà¤à¥¤
जैतून के तेल, घी और सरसों के तेल में ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में होता है। यह आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ की कà¥à¤› परतों को à¤à¥‡à¤¦à¥à¤¯ बना सकता है। इसका मतलब है कि ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ यà¥à¤•à¥à¤¤ तेलों को लगाने से शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ और अधिक रà¥à¤–ी और संवेदनशील हो सकती है।
हालांकि मालिश के लिठतेल के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² पर और अधिक शोध की जरà¥à¤°à¤¤ है। वरà¥à¤¤à¤®à¤¾à¤¨ शोध इस धारणा पर आधारित हैं कि तेल शिशॠके शरीर पर लगाकर छोड़ दिया जाता है और शिशॠको नहलाकर तेल धोया नहीं जाता। यह à¤à¥€ संà¤à¤µ है कि आप पहले से शिशॠकी मालिश के लिठघी, जैतून के तेल या सरसों के तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कर रही हैं और शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर कोई शà¥à¤·à¥à¤•ी या अनà¥à¤¯ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ नहीं देखी है। ये मालिश के लिठकाफी लोकपà¥à¤°à¤¿à¤¯ तेल हैं और हो सकता है कि आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर इनका बà¥à¤°à¤¾ असर इसलिठनहीं हà¥à¤† कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि आपने शिशॠको नहलाने के दौरान तेल को तà¥à¤µà¤šà¤¾ से धो दिया।
ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ और इसके तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर असर को लेकर हà¥à¤ˆ अधिकांश शोध इस बात पर आधारित हैं कि यह तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ समय तक बना रहता है।
मगर अपने शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर शà¥à¤·à¥à¤•ी या जलन व असहजता के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ पर धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ दें। यदि आपको à¤à¤¸à¤¾ कà¥à¤› नजर आà¤, तो कोई दूसरा तेल चà¥à¤¨à¥‡à¤‚, जो शिशॠकी नाजà¥à¤• तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठउचित हो।
à¤à¤°à¥‹à¤®à¤¾à¤¥à¥ˆà¤°à¥‡à¤ªà¥€ à¤à¤¸à¥‡à¤‚शियल आॅयल, जैसे कि टी टà¥à¤°à¥€ आॅयल या बबूने के फूल का तेल (कैमोमाइल तेल) का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² नहीं किया जाना चाहिà¤, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि ये आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठउचित नहीं हैं।
यदि आप यह तय नहीं कर पा रही हों कि मालिश के लिठकौन सा तेल सही रहेगा, तो डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें। वे आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठउचित सà¥à¤—ंध रहित तेल, कà¥à¤°à¥€à¤® या लोशन बता सकते हैं। यदि किसी विशेष तेल के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² के बाद आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल होने लगे, उसमें खà¥à¤œà¤²à¥€, दरà¥à¤¦ हो या फिर पपड़ी बनने लगे तो तà¥à¤°à¤‚त उस तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² बंद कर दें।
शिशॠकी तेल मालिश नहलाने से पहले करें या बाद में?
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में तेल की मालिश अकà¥à¤¸à¤° नहलाने से पहले की जाती है। यह à¤à¤• अचà¥à¤›à¤¾ तरीका है, खासकर यदि आप गाढ़े तेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करती हैं, जो कि पूरी तरह अवशोषित नहीं होते या फिर ओलिà¤à¤• à¤à¤¸à¤¿à¤¡ की उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ वाले तेलों का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करती हैं, जैसे कि सरसों या जैतून का तेल।
बहरहाल, कà¥à¤› तरह के तेल, खासकर कि मिनरल बेबी आॅयल, मालिश के बाद तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर à¤à¤• पतली परत छोड़ देते हैं। इसलिठनहलाने के बाद मिनरल आॅयल लगाने से तà¥à¤µà¤šà¤¾ में नमी बनाठरखने में मदद मिल सकेगी, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे पानी का वाषà¥à¤ªà¥€à¤•रण धीमा हो जाता है। यदि आपके शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ रà¥à¤–ी है, तो यह विकलà¥à¤ª अचà¥à¤›à¤¾ है।
कà¥à¤¯à¤¾ गरà¥à¤®à¥€ व आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम में à¤à¥€ तेल की ही मालिश करनी चाहिà¤?
कà¥à¤› विशेषजà¥à¤ž मानते हैं कि यदि गरà¥à¤®à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के मौसम में तेल तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर लगा रहता है, तो यह रोमछिदà¥à¤°à¥‹à¤‚ को अवरà¥à¤¦à¥à¤§ कर सकता है और पसीना फंसा रह सकता है। उनका मानना है कि नहलाने के बाद तेल लगाने से à¤à¥€ à¤à¤¸à¤¾ ही होता है, यह नमी को फंसा लेता है। मगर यदि गरà¥à¤® और आरà¥à¤¦à¥à¤° मौसम में तà¥à¤µà¤šà¤¾ पसीने से नम रहे तो इससे घमौरियां हो सकती हैं।
इसलिà¤, हालांकि इस विषय पर कोई शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है, मगर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिहाज से गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में आप शायद नहलाने से पहले ही तेल से मालिश करना चाहें और बाद में इसे अचà¥à¤›à¥€ तरह धो दें।
विशेषजà¥à¤ž सलाह देते हैं कि केवल उतनी मातà¥à¤°à¤¾ में तेल, कà¥à¤°à¥€à¤® या लोशन का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करते जितने से शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ चिकनी हो जाà¤à¥¤ तेल की मोटी परत लगाने से शिशॠको गरà¥à¤®à¥€ और खà¥à¤œà¤²à¤¾à¤‡à¤Ÿ महसूस हो सकती है, विशेषकर कि गरà¥à¤®à¥€ के मौसम में और इससे कपड़ों पर दाग à¤à¥€ लग सकते हैं।
कà¥à¤¯à¤¾ शिशॠकी मालिश के लिठतेल घर पर बनाना चाहिà¤?
शिशॠकी मालिश के लिठघर पर तेल बनाने की बहà¥à¤¤ सारी विधियां उपलबà¥à¤§ हैं, शायद जितने घर, उतनी विधियां। आप शिशॠके लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ कà¥à¤› तेलों को मिलाकर à¤à¤• तेल बना सकती हैं। यदि आप पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तेलों को मिला रहे हैं, तो धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि आप उन तेलों को चà¥à¤¨à¥‡à¤‚ जिनमें पॉलीअनसैचà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ वसा उचà¥à¤š मातà¥à¤°à¤¾ में हो।
घर पर मालिश का तेल तैयार करने की विधियों में कà¥à¤› में तेल को मसालों के साथ गरà¥à¤® करने की जरà¥à¤°à¤¤ होती है। देश के उतà¥à¤¤à¤°à¥€ और पूरà¥à¤µà¥€ हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में, उदाहरण के तौर पर सरसों के तेल को लहसà¥à¤¨ की कà¥à¤› कलियों और मेथी दाने के साथ गरà¥à¤® किया जाता है।
माना जाता है कि लहसà¥à¤¨ में à¤à¤‚टीवायरल और à¤à¤‚टीबैकà¥à¤Ÿà¤¿à¤°à¤¿à¤¯à¤² ततà¥à¤µ होते हैं। इसे रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ मजबूत करने के लिठà¤à¥€ जाना जाता है। यह à¤à¥€ माना जाता है मेथी शरीर को आराम पहà¥à¤‚चाती है। कà¥à¤› कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सरसों तेल में अजवायन मिलाई जाती है। माना जाता है कि यह उदरशूल (कॉलिक) से गà¥à¤°à¤¸à¥à¤¤ शिशà¥à¤“ं को आराम पहà¥à¤‚चाता है।
इन मसालों के लाà¤à¤•ारी ततà¥à¤µ शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर किस तरह असर करते हैं, इस बात को लेकर कोई शोध उपलबà¥à¤§ नहीं है। इसलिठयह कहना मà¥à¤¶à¥à¤•िल है कि इनका इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² सही है या नहीं। आप शिशॠकी मालिश जिस तेल से करना चाहें, उसके इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² से पहले डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात कर लें और शिशॠकी सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के लिठनिमà¥à¤¨à¤¾à¤‚कित à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤à¥‹à¤‚ को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ में रखें:
मà¥à¤–à¥à¤¯ तेल के तौर पर à¤à¤¸à¥‡ तेल को चà¥à¤¨à¥‡ जो शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ के लिठसौमà¥à¤¯ हो।
तेल जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गरà¥à¤® तो नहीं है, यह जांचने के लिठअपनी कोहनी का अगà¥à¤°à¤à¤¾à¤— इसमें डà¥à¤¬à¤¾à¤•र देखें, जैसा कि आप नहाने के पानी का तापमान जांचने के लिठकरती हैं। मालिश करने से पहले तेल गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ महसूस होना चाहिà¤, तेज गरà¥à¤® नहीं।
तेल को तैयार करने के बाद जब पहली बार शिशॠको लगाà¤à¤‚, तो शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ में तà¥à¤µà¤šà¤¾ के थोड़े से हिसà¥à¤¸à¥‡ पर इसे लगाकर देखें। 24 घंटों तक इंतजार करें और देखें कि तेल में मौजूद किसी ततà¥à¤µ से शिशॠको पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ तो नहीं हो रही है। यदि तà¥à¤µà¤šà¤¾ लाल दिखे, जलन या असहजता और खà¥à¤¶à¥à¤•ी दिखे तो इस तेल को शिशॠकी मालिश के लिठइसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें। इस बारे में शिशॠके डॉकà¥à¤Ÿà¤° से बात करें।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर जलन पैदा करने वाले मसाले जैसे कि मिरà¥à¤š या काली मिरà¥à¤š का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² न करें।
कà¥à¤› परिवारों में तेल में मलाई, बेसन और हलà¥à¤¦à¥€ मिलाकर लेप बनाया जाता है। कचà¥à¤šà¥‡ दूध का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² शायद सही नहीं है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का खतरा रहता है। कचà¥à¤šà¥‡ दूध में à¤à¤¸à¥‡ जीवाणॠहो सकते हैं, जो डायरिया या टीबी पैदा कर सकते हैं। साथ ही, बेसन के दरदरेपन से शिशॠकी तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर खरोंच या रगड़ लग सकती है।
शिशॠकी तेल से मालिश करने पर मà¥à¤à¥‡ कौन से अनà¥à¤¯ à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤ बरतने चाहिà¤?
मालिश के लिठआईà¤à¤¸à¤†à¤ˆ और à¤à¤—मारà¥à¤• पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤ ित बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड के तेल चà¥à¤¨à¥‡à¤‚। खà¥à¤²à¥‡ में मिलने वाले या बिना बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड के तेलों से तà¥à¤µà¤šà¤¾ का इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है। यदि आपका शिशॠगलती से à¤à¤¸à¥‡ तेल मà¥à¤‚ह में निगल ले, तो इससे पेट का इनफेकà¥à¤¶à¤¨ हो सकता है।
शिशॠकी नाक, आंखों, नाà¤à¤¿ या कानों में कोई तेल न डालें। हालांकि, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में यह काफी पà¥à¤°à¤šà¤²à¤¿à¤¤ है मगर इन जगहों में तेल डालना हानिकारक हो सकता है और संकà¥à¤°à¤®à¤£à¥‹à¤‚ का कारण बन सकता है।
मालिश करते हà¥à¤ हलà¥à¤• हाथों से और नीचे से ऊपर की तरफ मलें। शिशॠका सिर दबाने से यह गोल नहीं बनेगा और न ही अगà¥à¤° जंघा को दबाने से यह सीधी होगी।
आप जो à¤à¥€ तेल चà¥à¤¨à¥‡, लेबल को धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ से पढ़े और इसे सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ ढंग से रखें। मिनरल आॅयल में शायद इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² करने की अंतिम तिथि दी गई होती है, वहीं वनसà¥à¤ªà¤¤à¥€ तेलों में बेसà¥à¤Ÿ बिफोर तिथि दी हो होती है। यह तिथि बताती है कि खाना पकाने के लिठतेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² कब तक सही है, न कि तà¥à¤µà¤šà¤¾ पर इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤²à¥¤ मगर इससे आपको कà¥à¤› अंदाजा तो लग ही जाà¤à¤—ा कि इसे कब तक इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² किया जा सकता है। यदि आपने शिशॠकी मालिश के लिठमालिशवाली को रखा है, तो इन सबके बारे में उससे बात करें। कà¥à¤› मालिशवाली अपना तेल लाती हैं, और इसी के इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² पर जोर देती हैं। मगर बेहतर है कि आप à¤à¤¹à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤¤ बरतें। घर पर तैयार किठकà¥à¤› तेलों में à¤à¤¸à¥€ जड़ी-बूटियां, à¤à¤¡à¤¿à¤Ÿà¤¿à¤µà¥à¤¸ या ततà¥à¤µ हो सकते हैं, जो शायद शिशॠके लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ न हों।
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